
जमशेदपुर : जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति द्वारा संचालित ‘पुस्तक दान अभियान’ शहर में एक नई शैक्षणिक क्रांति की पटकथा लिख रहा है। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का ही परिणाम है कि 20 जनवरी 2026 तक अभियान के झोले में ज्ञान की 417 अनमोल पुस्तकें जमा हो चुकी हैं। यह अभियान न केवल लाइब्रेरी को समृद्ध कर रहा है, बल्कि समाज में पठन-पाठन की लुप्त होती संस्कृति को भी पुनर्जीवित कर रहा है।
दानदाताओं ने दिखाई दरियादिली: मंजू खंडेलवाल
अव्वलअभियान की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि समाज के हर वर्ग के लोगों ने अपनी व्यक्तिगत लाइब्रेरी से पुस्तकें दान की हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, श्रीमती मंजू खंडेलवाल 150 पुस्तकों के साथ शीर्ष दानदाता बनी हुई हैं। उनके इस योगदान की प्रशासनिक हलकों में काफी सराहना हो रही है।
प्रमुख पुस्तक दानदाताओं की सूची
डीएम लाइब्रेरी के लिए शहर के लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे है । इस कड़ी में मंगलवार को श्रीमती मंजू खंडेलवाल ने 150,श्री बन्नी गुप्ता 95 ,श्री सम्राट चक्रवर्ती 45 ,श्रीमती अन्नी अमृता 35 , श्रीमती महेश्वरी देवी 24 ,श्री मनचंद अग्रवाल 15 ,डॉ. शाहीर पाल 14 ,श्री सोहैब अहमद 11 , और जिला उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने 07 किताब दिए।इसके अतिरिक्त श्री विकास श्रीवास्तव, श्री बी. संतोष स्वामी और श्री भोगला सोरेन जैसे जागरूक नागरिकों ने भी इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दिया है।
युवाओं और विद्यार्थियों के लिए खुलेगा ज्ञान का पिटारा
दान स्वरूप प्राप्त ये पुस्तकें साहित्य, विज्ञान, इतिहास, प्रतियोगी परीक्षाओं और दर्शन जैसे विभिन्न विषयों से संबंधित हैं। इन पुस्तकों का उपयोग लाइब्रेरी में आने वाले उन विद्यार्थियों और युवाओं के लिए किया जाएगा जो आर्थिक अभाव के कारण महंगी किताबें नहीं खरीद पाते।
जेएनएसी की अपील: “एक किताब, एक भविष्य”
जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति ने सभी दानदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शहर के अन्य नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शिक्षाविदों से भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की है। समिति का मानना है कि घर के कोनों में रखी पुरानी पुस्तकें किसी युवा का भविष्य संवार सकती हैं।
