
जमशेदपुर: टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण और स्थानीय रैयतों के अधिकारों को लेकर झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। सोमवार को मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मुलाकात की और अपनी मांगों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। मंच ने स्पष्ट रूप से 2005 के लीज नवीनीकरण की पुनः समीक्षा और विस्थापितों के हक की मांग उठाई है।
रैयतों और मूल निवासियों के अधिकारों पर जोर
ज्ञापन के माध्यम से मंच ने आरोप लगाया है कि बिना विधिवत लीज या अधिग्रहण के कई जमीनों पर कब्जा किया गया है। मंच की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं जिसमे अवैध तरीके से कब्जाई गई जमीनों की पहचान कर उन्हें तत्काल मूल रैयतों को लौटाया जाए।वर्ष 2005 में हुए टाटा लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया की फिर से जांच और समीक्षा की जाए।छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संताल परगना काश्तकारी अधिनियम के उल्लंघन के मामलों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामसभा और पेसा कानून को प्राथमिकता
मंच ने स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की मांग करते हुए कहा कि क्षेत्र के तालाब, जलस्रोत और गैर-मजरुआ (सरकारी) जमीन का प्रबंधन तत्काल ग्रामसभा को सौंपा जाए। पेसा कानून के तहत किसी भी औद्योगिक गतिविधि या भूमि उपयोग के लिए ग्रामसभा की लिखित सहमति अनिवार्य की जाए।
विस्थापितों का पुनर्वास और स्थानीय बहाली
हरमोहन महतो ने कहा कि कंपनी के विकास में अपनी जमीन देने वाले विस्थापित आज भी अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मंच ने मांग की है कि टाटा स्टील और संबंधित कंपनियों में स्थानीय युवाओं की बहाली को प्राथमिकता दी जाए।लीज से जुड़ी सभी जानकारियां और शर्तें सार्वजनिक डोमेन में रखी जाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।टाटा लीज और स्थानीय मुद्दों की देखरेख के लिए एक जिला स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया जाए।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से आग्रह किया कि इन संवेदनशील मुद्दों पर जिला प्रशासन जल्द से जल्द संज्ञान ले और प्रभावित परिवारों के साथ न्याय करे। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करेंगे।
