
जमशेदपुर: लौहनगरी के प्रतिष्ठित ग्रेजुएट कॉलेज के मानविकी संकाय द्वारा शनिवार को ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने भाषाई विविधता के महत्व और अपनी संस्कृति को बचाने में मातृभाषा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
मातृभूमि और ममता की शक्ति है मातृभाषा
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वीणा सिंह प्रियदर्शी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने मातृभाषा के भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:”मातृभाषा वह अटूट शक्ति है जो हमें मां, ममता और मातृभूमि से जोड़ती है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान है जो हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।”
ऐतिहासिक संघर्ष और वैश्विक मान्यता
मुख्य वक्ता हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय ने मातृभाषा के वैश्विक संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने 1952 में ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों के बलिदान को याद करते हुए बताया कि कैसे भाषा के सम्मान के लिए दी गई शहादत के फलस्वरूप यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। डॉ. पाण्डेय ने स्वरचित काव्य पंक्तियों— “बिनु भाषा ज्ञान के, मानव नीरस जमी़न”— के माध्यम से उपस्थिति को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा और बौद्धिक विकास के लिए मातृभाषा अनिवार्य है।
प्रतियोगिताओं में छात्राओं ने दिखाया हुनर
समारोह के दौरान विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेताओं को प्राचार्या द्वारा पुरस्कृत किया गया:प्रतियोगिता में प्रथम स्थान (विजेता)गीत प्रतियोगिता में मनोरमा एवं समूह भाषण प्रतियोगिता में मोनिका सांडा ,स्लोगन प्रतियोगिता : मोनिका सांडा,कविता पाठ: श्रुति चौधरी,पोस्टर मेकिंग: मनोरमा पुर्ती।
सफल आयोजन और सहभागिता
कार्यक्रम का कुशल संयोजन संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिन्हा ने किया। मंच का संचालन डॉ. फिरदौस जबीन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. स्मिता नंदी द्वारा किया गया। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुए इस समारोह में कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक, शिक्षिकाएं और कर्मचारी भारी संख्या में उपस्थित रहे।
