जमशेदपुर: टाटानगर स्टेशन पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने ट्रेनों के परिचालन में आए सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ समय से ट्रेनों की समयबद्धता एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन हालिया प्रयासों से स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
समयबद्धता में सुधार: 120 मिनट से घटकर 20 मिनट हुई देरी
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पिछले 15 दिनों में ट्रेनों के समय में सुधार के लिए व्यक्तिगत स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। पहले ट्रेनों की समयबद्धता महज 35% तक गिर गई थी, जो अब सुधरकर 65% से 75% के बीच पहुंच गई है। जो ट्रेनें औसतन 120 मिनट की देरी से चल रही थीं, अब उनका विलंब घटकर 15 से 20 मिनट के भीतर आ गया है।
बुनियादी ढांचे का विस्तार: नई लाइनों का जाल
ट्रैफिक जाम की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
तीसरी और चौथी लाइन: सीनी-चाईबासा, गम्हरिया-चांडिल और आसनबनी से बागबेड़ा सेक्शन में नई लाइनें बिछाई जा रही हैं।
आदित्यपुर-टाटा सेक्शन: यहाँ तीसरी लाइन का कार्य अंतिम चरण में है।
5वीं और 6ठी लाइन: सीनी से राजखरसावां के बीच 5वीं और 6ठी लाइन की योजना तैयार है, जिससे ट्रायंगल सेक्शन पर दबाव कम होगा और ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा।
मालगाड़ी बनाम यात्री ट्रेन: आंकड़ों से स्पष्टीकरण
अधिकारियों ने उन चर्चाओं को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों पर प्राथमिकता दी जा रही है।रविवार को इस सेक्शन से 47 यात्री ट्रेनें गुजरीं, जबकि मालगाड़ियों की संख्या महज 32-35 थी।’डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ से जुड़ने के बाद मालगाड़ियों को पूरी तरह अलग ट्रैक पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे मुख्य लाइन पर यात्री ट्रेनों की रफ्तार 130 किमी/घंटा तक हो सकेगी।
भौगोलिक चुनौतियां और सुरक्षा
सीनियर डीसीएम ने बताया कि इस मंडल में एलिफेंट कॉरिडोर (हाथी गलियारा) होने के कारण कई संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेनों की गति धीमी रखनी पड़ती है। इसके अलावा, तकनीकी बाधाओं और ट्रैक मेंटेनेंस के लिए भी लगातार ब्लॉक लिए जा रहे हैं।
