जमशेदपुर: ‘डिजिटल व्यसन’ के खिलाफ सुराज्य अभियान का शंखनाद, कर्नाटक की तर्ज पर स्क्रीन टाइम सीमित करने की मांग

जमशेदपुर : विद्यार्थियों में बढ़ती इंटरनेट और स्मार्टफोन की लत को लेकर जमशेदपुर में ‘सुराज्य अभियान’ ने मोर्चा खोल दिया है। अभियान के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर झारखंड में ‘डिजिटल वेल-बीइंग’ नीति लागू करने का आग्रह किया है।

25% किशोर इंटरनेट के आदी: रिपोर्ट का हवाला

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में चौंकाने वाले आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 25 प्रतिशत किशोर इंटरनेट के गंभीर व्यसन का शिकार हो चुके हैं।अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण छात्रों में नींद की कमी, मानसिक चिंता, एकाग्रता में गिरावट और लक्ष्य से भटकाव जैसी गंभीर समस्याएं देखी जा रही हैं।

कर्नाटक मॉडल लागू करने का प्रस्ताव

सुराज्य अभियान ने कर्नाटक सरकार के प्रस्तावित प्रारूप को झारखंड में भी अपनाने की मांग की है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए मनोरंजन/अतिरिक्त स्क्रीन टाइम प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटा हो।शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट के उपयोग को नियंत्रित या बंद करने की सिफारिश।सोने से कम से कम एक घंटे पहले छात्रों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखा जाए।

‘चाइल्ड प्लान’ और डिजिटल डिटॉक्स की मांग

ज्ञापन में बच्चों को तकनीकी रूप से सुरक्षित रखने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। मोबाइल में ऐसी व्यवस्था हो जहां निर्धारित समय के बाद इंटरनेट स्वतः बंद हो जाए और केवल जरूरी सेवाएं ही उपलब्ध रहें।स्कूलों में ‘ऑनलाइन सुरक्षा’ और ‘डिजिटल वेल-बीइंग’ को विषय के रूप में शामिल किया जाए। स्कूलों में नियमित अंतराल पर ‘टेक-फ्री टाइम’ और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। गोवा सरकार की तर्ज पर 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के विचार का भी समर्थन किया गया।

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