
सरायकेला:आगामी नगर पंचायत चुनाव 2026 की सुगबुगाहट शुरू होते ही आरक्षण के मुद्दे पर सियासी पारा चढ़ गया है। सरायकेला नगर पंचायत के वार्ड संख्या 10 में आरक्षण के निर्धारण को लेकर स्थानीय निवासियों ने मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि वार्ड की जनसांख्यिकीय सच्चाई को नजरअंदाज कर सीट को आरक्षित किया गया है।
विधायक प्रतिनिधि के नेतृत्व में उपायुक्त से गुहार
शनिवार को सरायकेला विधायक प्रतिनिधि सनंद कुमार आचार्य के नेतृत्व में वार्डवासियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त से मुलाकात की। ग्रामीणों ने एक लिखित आवेदन सौंपकर वार्ड संख्या 10 के लिए प्रस्तावित आरक्षण व्यवस्था पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसमें अविलंब संशोधन की मांग की।
आंकड़ों का खेल: 99% सामान्य-OBC आबादी पर 1% से कम का आरक्षण?
विधायक प्रतिनिधि सनंद कुमार आचार्य ने आरक्षण की विसंगति को आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया। उन्होंने बतायावार्ड संख्या 10 में कुल 747 मतदाता हैं।इस वार्ड में अनुसूचित जनजाति वर्ग के केवल 6 मतदाता हैं, जो कुल जनसंख्या का 1 प्रतिशत से भी कम है।वार्ड में लगभग 99 प्रतिशत आबादी सामान्य और पिछड़ा वर्ग से संबंधित है।आचार्य ने तर्क दिया कि जहाँ अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या नगण्य है, उस वार्ड को ST के लिए आरक्षित करना न केवल अतार्किक है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों के खिलाफ भी है।
विकास पर पड़ रहा है बुरा असर
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को अवगत कराया कि पिछले नगर पंचायत चुनाव में भी इसी आरक्षण विवाद के कारण इस वार्ड से पार्षद का चुनाव नहीं हो पाया था। पार्षद नहीं होने से वार्ड के बुनियादी विकास कार्य ठप पड़े रहे और जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। वार्डवासियों का कहना है कि यदि इस बार भी आरक्षण में सुधार नहीं किया गया, तो वे चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं या फिर से क्षेत्र का विकास बाधित होगा।
प्रशासन से बदलाव की मांग
विधायक प्रतिनिधि और वार्डवासियों ने सामूहिक रूप से मांग की है कि वार्ड संख्या 10 को प्रस्तावित अनुसूचित जनजाति आरक्षण से तुरंत मुक्त किया जाए। इसे वार्ड की वास्तविक सामाजिक संरचना के अनुसार सामान्य या पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल किया जाए।
अब प्रशासन के पाले में गेंद
सरायकेला जिला प्रशासन अब इस तकनीकी पेंच को कैसे सुलझाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
