
जमशेदपुर।झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में शनिवार को बिष्टूपुर स्थित तिलक पुस्तकालय (कांग्रेस कार्यालय) में आयोजित राज्य स्तरीय प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं के क्षरण, आर्थिक बदहाली और मनरेगा जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को कमजोर करने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया।
महापुरुषों की विरासत और संविधान पर प्रहार
बन्ना गुप्ता ने भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस ने देश के लिए बलिदान दिया है। “इस मिट्टी में इंदिरा गांधी का लहू सना है और राजीव गांधी ने राष्ट्र के लिए प्राणों की आहुति दी। आज वही भाजपा संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर के बनाए कानूनों और लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर कर रही है।” उन्होंने बापू की शहादत का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रविरोधी ताकतों ने गांधी जी की हत्या की, लेकिन आज भाजपा उन्हीं के प्रतीकों (जैसे चश्मा) का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग कर रही है, जबकि उनके मूल विचारों का हनन किया जा रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर घेरा: “1.35 लाख पहुँचा सोना, 92 के पार डॉलर”
पूर्व मंत्री ने देश की चरमराती अर्थव्यवस्था के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के समय डॉलर 58 रुपये था, जो आज 92 रुपये के पार है। सोने की कीमतें 1.35 लाख रुपये तक पहुँच गई हैं। नियोजनालयों के आँकड़े गवाह हैं कि देश में बेरोजगारी की स्थिति कितनी भयावह है। बीसीसीएल , रेलवे और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों को चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में बेचा जा रहा है।
मनरेगा को लेकर आर-पार की जंग: 5 जनवरी को राजभवन मार्च
बन्ना गुप्ता ने मनरेगा को लेकर भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।पहले केंद्र 90% और राज्य 10% खर्च वहन करते थे, लेकिन भाजपा ने इसे बदलकर 60:40 कर दिया है, जिससे राज्यों पर बोझ बढ़ा है और मजदूरों का नुकसान हो रहा है। कांग्रेस पार्टी आगामी 5 जनवरी को रांची के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से राजभवन तक ‘मनरेगा बचाओ रैली’ निकालेगी। इसमें राज्यभर के कार्यकर्ता और मजदूर शामिल होकर सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों का विरोध करेंगे।
विदेश नीति और आरएसएस पर कटाक्ष
बन्ना गुप्ता ने याद दिलाया कि सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन आज भाजपा उन्हीं के नाम पर राजनीति करती है। उन्होंने विदेश नीति पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर हुई है, यहाँ तक कि युद्ध रुकवाने के दावों पर भी सरकार की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं आता।
