
लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा जिले में आज सुबह एक दिल दहला देने वाला मंजर सामने आते-आते रह गया। शंख नदी पर बने रेलवे पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण एक बड़ी रेल दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी, लेकिन रेलवे प्रशासन की सूझबूझ और तत्परता ने सैकड़ों जिंदगियों को सुरक्षित बचा लिया।
‘मौत के पुल’ से चंद कदम दूर रुकी ट्रेन
आज सुबह रांची से चंदवा-टोरी जा रही मेमू ट्रेन (संख्या: 68027) अपने निर्धारित समय पर सुबह करीब 9:00 बजे रांची से रवाना हुई थी। यात्रियों के अनुसार, आज ट्रेन में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ थी। ट्रेन जैसे ही लोहरदगा स्टेशन के करीब शंख नदी पर बने पुल के पास पहुंची, तभी रेल कर्मियों को पुल के गाटर )के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली।खतरे को भांपते हुए लोको पायलट और रेलवे स्टाफ ने बिना समय गंवाए ट्रेन को पुल के ठीक पहले रोक दिया। अगर कुछ मिनटों की भी देरी होती, तो पूरी ट्रेन क्षतिग्रस्त पुल के ऊपर होती, जिससे एक भयावह हादसा हो सकता था।
यात्रियों में अफरा-तफरी, पैदल पार किया सफर
ट्रेन के अचानक रुकते ही यात्रियों में हड़कंप मच गया। जैसे ही लोगों को पता चला कि आगे पुल टूटा हुआ है, उनके चेहरे पर मौत का खौफ साफ नजर आया।सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेन को वहीं खाली करा लिया गया। यात्री अपनी जान बचाकर रेलवे ट्रैक के सहारे पैदल ही पुल पार कर अपने गंतव्य की ओर निकल पड़े।
प्रशासन अलर्ट: जांच के लिए डीआरएम रवाना
घटना की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सूत्रों के अनुसार, रांची के डीआरएम अपनी तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं। क्षतिग्रस्त गाटर की मरम्मत और जांच पूरी होने तक इस रूट पर रेल परिचालन को पूरी तरह बाधित रखा जा सकता है।
वर्तमान स्थिति और सुरक्षा उपाय
वर्तमान में रेलवे ने सुरक्षा कारणों से पुल के पास सुरक्षा घेरा बना दिया है। तकनीकी टीम यह जांच कर रही है कि पुल का गाटर क्षतिग्रस्त कैसे हुआ और क्या अन्य पीलरों में भी कोई तकनीकी खराबी है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।
