एमएसएमई डिफेंस कॉन्क्लेव–2026 का उद्घाटन, झारखंड में डिफेंस कॉरिडोर की जताई संभावना

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आदित्यपुर :आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने और स्थानीय एमएसएमई उद्योगों को रक्षा उत्पादन से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित एमएसएमई डिफेंस कॉन्क्लेव–2026 का उद्घाटन केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने किया। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि झारखंड संसाधनों से संपन्न राज्य है, ऐसे में यहां डिफेंस कॉरिडोर क्यों नहीं बन सकता। जो सुविधाएं उपलब्ध हैं, उन्हें और आगे बढ़ाने की जरूरत है।रांची में आयोजित एस्टेक कार्यक्रम और डिफेंस कॉन्क्लेव के सफल आयोजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में करीब 200 स्टॉल लगाए गए, जो राज्य की औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है। डिफेंस कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री को भी आमंत्रण दिया गया था। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक संकेत नहीं है, लेकिन जहां-जहां डिफेंस कॉरिडोर बने हैं, वहां राज्य सरकार की इच्छाशक्ति अहम रही है। यदि राज्य सरकार केंद्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चले, तो झारखंड में भी डिफेंस कॉरिडोर का सपना साकार हो सकता है।

रक्षा उत्पादन में भारत की बढ़ती ताकत

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद लंबे समय तक भारत रक्षा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर रहा। एक समय ऐसा भी कहा जाता था कि देश के पास केवल दो दिन का गोला-बारूद शेष है। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।उन्होंने बताया कि आज भारत दुनिया के 92 देशों को रक्षा उपकरणों की आपूर्ति कर रहा है। रक्षा उत्पादन के लिए तीन लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि इस वर्ष का रक्षा बजट दो लाख करोड़ रुपये रखा गया है।

एमएसएमई और स्टार्टअप की भूमिका

मंत्री संजय सेठ ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और दुनिया भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करना है, तब तक देश में लगभग 70 करोड़ युवा आबादी होगी।
उन्होंने बताया कि देश में 7 लाख से बढ़कर 2 लाख 9 हजार से अधिक स्टार्टअप हो चुके हैं और स्टार्टअप के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।देश में करीब 4 करोड़ एमएसएमई हैं, जो 14 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 16 हजार एमएसएमई ही सीधे डिफेंस सेक्टर से जुड़े हैं। इसे बढ़ाने की आवश्यकता है।

आदित्यपुर को बनाने की अपील डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब

केंद्रीय मंत्री ने भारत चेंबर ऑफ कॉमर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एमएसएमई सेक्टर को डिफेंस से जोड़ने के लिए तेजी से काम किया जाए। उन्होंने आदित्यपुर को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की अपील की।उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि चेन्नई में पति-पत्नी द्वारा 77 एकड़ में ड्रोन फैक्ट्री स्थापित की गई, जिससे भारत एग्रीकल्चर सेक्टर में ड्रोन निर्माण का बड़ा केंद्र बन चुका है।

मार्च में प्रतिनिधिमंडल, डिफेंस सेक्रेटरी से मुलाकात की कोशिश

मंत्री ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर के विकास को लेकर वे मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। मार्च महीने में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाएगा और प्रयास रहेगा कि डिफेंस सेक्रेटरी से बैठक कराई जाए।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना, वायुसेना और थलसेना में स्वदेशीकरण की दिशा में तेज प्रयास चल रहे हैं। देश के वैज्ञानिक, इंजीनियर और उद्यमी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट देश बन चुका है और करीब 50 लाख करोड़ रुपये का डिजिटल ट्रांजैक्शन हो रहा है, जो देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।

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