
जमशेदपुर। ब्रह्मर्षि विकास मंच, जमशेदपुर के नेतृत्व को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में घोषित किए गए अध्यक्ष और महासचिव के नामों के खिलाफ अब समाज के सभी प्रमुख उम्मीदवारों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। उम्मीदवारों ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस पूरी प्रक्रिया को मनमाना, पूर्वनिर्धारित और अलोकतांत्रिक करार दिया है।
“समाज नहीं, परिवारवाद का हुआ चयन”
विरोध कर रहे उम्मीदवारों का सीधा आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष और पूर्व महासचिव ने संस्था पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए अपने ही रिश्तेदारों को पदों पर मनोनीत कर दिया है।विरोधियों का कहना है कि मंच का चुनाव नहीं बल्कि ‘मनोनयन’ हुआ है, जो कि पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है। उम्मीदवारों ने सवाल उठाया कि रायशुमारी कब, कहाँ और किन लोगों से की गई, इसकी कोई जानकारी साझा नहीं की गई। संचालन समिति ने उम्मीदवारों से मिलने तक से इनकार कर दिया।
वोट बैंक बनाने और समाज को खंडित करने की साजिश
उम्मीदवारों ने इस विवाद के पीछे एक गहरी राजनैतिक साजिश का अंदेशा जताया है। उनका आरोप है किबाहरी और असामाजिक तत्वों के प्रभाव में आकर समाज को खंडित रखा जा रहा है। समाज को केवल एक ‘वोट बैंक’ तक सीमित रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि राजनैतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए ब्रह्मर्षि समाज को किसी महत्वपूर्ण पद या टिकट से वंचित रखा जा सके।
विजन की कमी और दुरुपयोग का डर
अनुरोधकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन लोगों के नामों की घोषणा की गई है, उनके पास संस्था का कोई मूल पद या संवैधानिक आधार नहीं है। ऐसे में वे मंच का केवल दुरुपयोग ही करेंगे। उम्मीदवारों ने समाज से अपील की है कि समाज एकजुट हो और भविष्य में एक पारदर्शी लोकतांत्रिक चुनाव के माध्यम से ऐसे नेतृत्व को चुने जिसके पास ‘समाज को सर्वश्रेष्ठ बनाने का विजन’ हो।
विरोध करने वाले प्रमुख उम्मीदवार
इस विरोध पत्र को जारी करने वालों में समाज के कई प्रबुद्ध और सक्रिय सदस्य शामिल हैं, जिनमें प्रमुख नाम हैं धवन सिंह,सत्येन्द्र सिंह,राजेश सिंह,अनीस सिंह,रविनन्दन,मिथिलेश चौधरी,जय कुमार,विकास चन्द्रा और विनोद शुक्ला।
