
जमशेदपुर: झारखंड अलग राज्य आंदोलन के सूत्रधार और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय शिबू सोरेन (गुरु जी) को ‘भारत रत्न’ देने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। बुधवार को झारखंड आंदोलनकारी मंच के बैनर तले एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को एक मांग पत्र सौंपा। मंच ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शिबू सोरेन का संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि करोड़ों आदिवासियों और मूलवासियों की मुक्ति का संघर्ष था।
“गुरु जी की बदौलत ही आज झारखंड का अस्तित्व”: प्रमोद लाल
उपायुक्त कार्यालय के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता प्रमोद लाल ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन गुरु जी के दशकों लंबे संघर्ष और उनके नेतृत्व का परिणाम है। प्रमोद लाल ने बताया कि शिबू सोरेन ने ही झारखंड आंदोलन को शहरों से निकालकर सुदूर गांवों और जंगलों तक पहुँचाया, जिससे यह एक जन-आंदोलन बना।शोषण और महाजनी प्रथा के खिलाफ गुरु जी की लड़ाई ने ही अलग राज्य की आधारशिला रखी।उनके जुझारू नेतृत्व के बिना अलग झारखंड राज्य का सपना साकार होना असंभव था।
‘भारत रत्न’ नहीं मिला तो होगा आंदोलन
झारखंड आंदोलनकारी मंच ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में शिबू सोरेन के सामाजिक और राजनीतिक योगदान का विस्तार से वर्णन किया है। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनके सम्मान में ‘भारत रत्न’ की घोषणा नहीं की जाती है, तो झारखंड आंदोलनकारी मंच पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगा।
सम्मान की हकदार है झारखंड की माटी
मंच के सदस्यों का कहना है कि जिस तरह देश के अन्य महान सपूतों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया है, उसी तरह झारखंड की माटी के लाल शिबू सोरेन को यह सम्मान मिलना चाहिए। यह न केवल गुरु जी का, बल्कि उन हजारों शहीदों और आंदोलनकारियों का भी सम्मान होगा जिन्होंने अलग राज्य के लिए अपनी आहुतियां दी हैं।
