
जमशेदपुर : झारखंड वासी एकता मंच की ओर से बिस्टुपुर ऐतिहासिक गोपाल (रीगल) मैदान में भव्य टुसु मेला का आयोजन किया गया, जिसमे झारखंडी संस्कृति, परंपरा के एकता का अनोखा संगम देखने को मिला. मेला में जहां दूर दराज से क्षेत्रों से लोग विशाल टुसु प्रतिमा व चौड़ल लेकर आये थे, वहीं झुमुर सम्राट संतोष महतो के गीतों ने पूरा माहौल को टुसुमय बना दिया. मेला में आये दर्शकों के साथ साथ अतिथि भी झुमुर व टुसु गीतों पर थिरकते नज़र आये.संतोष महतो ने अपने गीतों का सफर में ‘भालोई धान होइलो ई बोछोर, साया-साड़ी किने दिबो तोर…’, ‘चल सजनी रीगल मैदाने, हमरा नाचबो गो टुसूर गाने…’, ‘ईटा के बोठे गो के बोठे, दादार साली सांगातेइ बोठे…’ गाकर शाम को रंगीन बना दिया.इस अवसर पर अतिथि के रूप में सांसद बिद्युत बरण महतो, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, ईचागढ़ विधायक सबिता महतो, जुगसलाई के विधायक मंगल कालिंदी, पूर्व राज्यसभा सांसद व पूर्व विधायक प्रदीप बलमुचू, पार्षद खगेन महतो, सुनील महतो मीता, डोमजूड़ी की मुखिया अनीता मुर्मू, पूर्व पार्षद सारथी महतो, चंद्रावती महतो, सुखदेव महतो, फणीन्द्र महतो, बबलू महतो, आर के सिन्हा, सत्यनारायण महतो (माकड़), श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के संस्थापक शम्भूनाथ महतो व श्रीमती संध्या रानी महतो, रमेश हांसदा, विकास सिंह, अनंतो प्रधान आदि मौजूद थे.अपने संबोधन में बिद्युत महतो ने कहा कि टुसु पर्व पूरे झारखंड में विभिन्नता में एकता का संदेश दे रहा है. उपस्थित लोगों से उन्होंने कहा कि वे अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपरा को बचाकर रखें वरना हम भी गुलगुलिया बनकर रह जाएंगे और धीरे धीरे विलुप्त हो जाएंगे. साथ ही उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षित करने पर भी जोर दिया.डॉ बलमुचू ने कहा कि यहां मौजूद युवा अपनी सभ्यता बचाने के लिए जुटे हैं. हम सबके सामने काफी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए हमे एकजुट होने की ज़रूरत है. यह संस्कृति एकता का प्रतीक है.बन्ना गुप्ता अपना संबोधन एक टुसु गीत से की. उन्होंने कहा कि यह खुशी का पर्व है, इसलिए सभी लोग आनंदपूर्वक इसे मनाएं और सावधानी से सुरक्षित तरीके से अपने घर पहुँचे.
विधायक मंगल कालिंदी ने कहा कि पूर्व सांसद स्व. सुनील महतो ने टुसु मेला को लेकर जो सपना देखा था, वह अब इस मेला में आकर साकार होता दिख रहा है.मंच का संचालन सीनू राव ने किया. आयोजन को सफल बनाने में सचिन महतो, गोपाल महतो, शिवशंकर महतो, विजय महतो, अशोक महतो, अजय रजक, स्वपन महतो, धनंजय महतो, जुगल किशोर मुखी, नकुल महतो, जगदीश राव सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे.
आदिवासी-कुड़मी के बीच खाई पाटने की ज़रूरत : आस्तिक
आस्तिक महतो ने अपने संबोधन में राज्य के सभी जाति के लोगों को एकजुट रहने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि निर्मल महतो के निधन के बाद सभी जाति के लोग इस आंदोलन में कूद गए. झारखंड आंदोलन शुरू हुए तो कई बार रास्ता भटक गए. हम सबके सामने ऐसे कई उदाहरण है, जिससे हमलोगों की एकता को दर्शाता है. श्री महतो ने कुड़मी और आदिवासी समुदाय के बीच जारी ‘शीतयुद्ध’ को हर हाल में खत्म करने की अपील की. कहा कि इस झारखंड अलग राज्य आंदोलन में सभी जातियों ने अपनी शहादत दी, लेकिन किसी के बहकावे में आकर हम आपसी एकता को तोड़ रहे हैं. सार्वजनिक रूप से उन्होंने दोनो समुदाय के लोगों से कहा कि संविधान ने हमे सरकार से मांग करने का अधिकार दिया है, अगर किसी को इन बातों पर ऐतराज है तो नियम और दायरे में रहकर विरोध करें, लेकिन एक दूसरे को अपशब्द न कहें. सोशल मीडिया पर भी सावधानी से अपनी बात रखने की अपील उन्होंने की.
झारखंड आंदोलनकारियों को दी गयी श्रद्धांजलि
मेला परिसर के मुख्य मंच के समक्ष झारखंड राज्य आंदोलन में शहीदों की तस्वीर रखी गयी थी, जिसमे अतिथियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. इस अवसर पर देश के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी रघुनाथ महतो, भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू, विनोद बिहारी महतो, दिशोम गुरु शिबू सोरेन, शहीद निर्मल महतो, राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री स्व. सुधीर महतो, पूर्व सांसद स्व. सुनील महतो, पूर्व विधायक साधुचरण महतो आदि की तस्वीर थी.
सभी अतिथियों को याद आये स्व. सुनील बाबू
मेला में आये कई अतिथियों ने आज पूर्व सांसद स्व. सुनील महतो को याद किया, जिन्होंने आजतक नदी, तालाब के किनारे मनाए जानेवाले टुसु मेला को शहर के हृदयस्थली बिस्टुपुर के गोपाल मैदान में टुसु पर्व को मनाने की नींव रखी. साथ ही राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री स्व. सुधीर महतो को भी इसलिए याद किया क्योंकि टुसु मेला के दूसरे ही दिन यानी 22 जनवरी को निधन हो गया.
टुसु, चौड़ल और बूढ़ी गाड़ी नाच में इन्हें मिला पुरस्कार
टुसु
पहला : धनंजय महतो, पदनामसाई – 41 हज़ार
दूसरा : जगन्नाथ महतो, खरसावां – 35 हज़ार
तीसरा : चाडरी, राजनगर – 31 हज़ार
चौथा : दीपक महतो, मनपीटा – 25 हज़ार
पांचवां : अंगद महतो – 20 हज़ार
छठा : फूलचंद गोराई – 15 हज़ार
चौड़ल
पहला : आदिवासी पुरन समिति, खूंटी ( वीरेंद्र पुरन) – 31 हज़ार
दूसरा : आदिवासी किसान चौड़ल समिति – 25 हज़ार
तीसरा : सरना चौड़ल समिति – 21 हज़ार
चौथा : श्री श्री मां मां दुर्गा समिति (हेमराज महतो) – 15 हज़ार
बूढ़ी गाड़ी नाच
पहला : महावीर महतो, पटमदा – 15 हज़ार
दूसरा : हरिहर टुडू, खाखीडीह – 11 हज़ार
तीसरा : नरवा ख़ुर्शी – 7 हज़ार
चौथा : जयचंद्र, सरायकेला – 5 हज़ार
