
जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित एसएसपी आवास और सर्किट हाउस जैसे अति-सुरक्षित क्षेत्र से 13 जनवरी को हुए उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में जमशेदपुर पुलिस की साख दांव पर लगी है। घटना के नौ दिन बीत जाने के बाद भी न तो कैरव गांधी का कोई सुराग मिला है और न ही अपहरणकर्ताओं का। पुलिस की जांच अब बिहार के नालंदा जिले में साइबर अपराधियों के गढ़ तक पहुँच गई है, लेकिन सफलता अब भी कोसों दूर है।
नालंदा का ‘राजशेखर’ बना मुख्य संदिग्ध, स्कॉर्पियो ने खोला राज
पुलिस की तकनीकी जांच में यह खुलासा हुआ है कि अपहरण में जिस सफेद स्कॉर्पियो का इस्तेमाल किया गया था, वह बिहार के नालंदा जिला अंतर्गत राजगीर थाना क्षेत्र के नई पोखर निवासी राजशेखर (पिता: उपेंद्र सिंह) के नाम पर पंजीकृत है।जमशेदपुर पुलिस की एक टीम जब तक नालंदा पहुँची, आरोपी राजशेखर अपनी गाड़ी समेत फरार हो चुका था। नालंदा पुलिस के सहयोग से उसके ठिकानों पर कई बार दबिश दी गई, लेकिन हर बार पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।
आरोपी का ‘प्रोफाइल’ और साइबर कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया है कि राजशेखर के पिता राजगीर में ‘मारवाड़ी बासा’ नामक होटल चलाते हैं। राजशेखर खुद पहले नवादा के हिसुआ में कंप्यूटर कोचिंग चलाता था, जो विवादों के कारण बंद हो गया। सूत्रों की मानें तो जिस ‘नई पोखर’ इलाके से वह ताल्लुक रखता है, वह साइबर अपराधियों का सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या यह फिरौती या किसी वित्तीय लेनदेन से जुड़ा साइबर-अपराध गिरोह का काम है।
महिला मित्र से पूछताछ भी रही बेनतीजा
जमशेदपुर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए सोनारी थाना क्षेत्र में रहने वाली कैरव गांधी की एक महिला मित्र से भी लंबी पूछताछ की। पुलिस को उम्मीद थी कि वहां से कोई ‘क्लू’ मिल सकता है, लेकिन इस पूछताछ से भी कोई ठोस नतीजे सामने नहीं आए हैं।
डीआईजी के दावों और धरातल की हकीकत में अंतर
कोल्हान के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा लगातार दावा कर रहे हैं कि पुलिस मामले के बहुत करीब है और जल्द ही इसका उद्भेदन कर लिया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि 9 दिन बाद भी पुलिस केवल ‘गाड़ी के मालिक’ तक ही पहुँच पाई है, वह भी कागजों में। एसएसपी आवास के ठीक बगल से हुए इस अपहरण ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
परिवार में कोहराम, समर्थकों की जुटी भीड़
इधर, कैरव गांधी के घर के बाहर रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है। 9 दिनों से परिवार गहरे सदमे में है। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हाई-अलर्ट के बावजूद अपराधी शहर की सीमा पार कर बिहार भागने में कैसे सफल रहे।
