
सरायकेला :कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सौजन्य से गुरुवार को सरायकेला जिला गव्य परिसर में ‘पशु मेला-सह-पशु प्रदर्शनी’ का भव्य आयोजन किया गया। जिला गव्य विकास पदाधिकारी डॉ. चंदन गोविन्द देव की अध्यक्षता में आयोजित इस मेले में जिले के विभिन्न प्रखंडों से सैकड़ों पशुपालक अपने पशुओं के साथ पहुँचे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पशुपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना रहा।
नस्ल सुधार से बढ़ेगी पशुपालकों की आय
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला गव्य विकास पदाधिकारी डॉ. चंदन गोविन्द देव ने सरकार की महत्वाकांक्षी ‘कृत्रिम गर्भाधान योजना’ की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा सरकार द्वारा पशुओं की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जा रही है। कम दूध देने वाली स्थानीय गायों का उन्नत नस्ल के सीमेन से प्रजनन कराकर आने वाली पीढ़ी को अधिक दुग्ध उत्पादन के योग्य बनाया जाता है।योजना के तहत पशुओं का ऑनलाइन पंजीकरण कर उनके कान में आधार आधारित टैग नंबर लगाया जाता है, जिससे पशु की पूरी केस हिस्ट्री और विवरण एक क्लिक पर उपलब्ध रहता है।
7 उन्नत गायों का किया गया वितरण
पशुपालकों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से मेले के दौरान कुल सात उन्नत नस्ल की गायों का वितरण किया गया। लाभार्थी पशुपालकों ने सरकार की इस पहल की सराहना की और इसे अपनी आजीविका के लिए एक बड़ा सहारा बताया।
जनप्रतिनिधियों ने बढ़ाया उत्साह
मेले में सरायकेला विधायक प्रतिनिधि सनंद आचार्य और खरसावां विधायक प्रतिनिधि मांगीलाल महतो भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पशुपालकों से सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की और कहा कि गव्य विकास के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाई जा सकती है।
प्रदर्शनी में दिखी विविधता
मेले के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में विभिन्न प्रखंडों से आए उन्नत किस्म के पशु आकर्षण का केंद्र रहे। विशेषज्ञों ने पशुपालकों को पशुओं के टीकाकरण, संतुलित आहार और बीमारियों से बचाव के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
