
जमशेदपुर:लौहनगरी में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन के खिलाफ सोमवार सुबह से शुरू हुई जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति की बड़ी कार्रवाई पर देश की सर्वोच्च अदालत ने फिलहाल रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद बिष्टुपुर और साकची समेत शहर के अन्य इलाकों में चल रहा ध्वस्तीकरण अभियान तत्काल प्रभाव से थम गया है।
सुबह एक्शन, दोपहर में स्टे: हाई वोल्टेज ड्रामा
सोमवार की सुबह जमशेदपुर में भारी प्रशासनिक हलचल के साथ शुरू हुई थी। झारखंड हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद जेएनएसी की टीम पुलिस बल के साथ दो दर्जन से अधिक चिन्हित इमारतों को तोड़ने निकली थी। उपनगर आयुक्त के नेतृत्व में दस्ता साकची और बिष्टुपुर के उन भवनों के बाहर पहुँच चुका था, जिन पर नक्शा विचलन का आरोप था।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
इसी बीच,स्मॉल एवं मीडियम बिल्डर एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी। आदेश की सूचना मिलते ही जेएनएसी की मशीनों और दस्ते को बैरंग लौटना पड़ा।
बिल्डरों का तर्क: “जब जुर्माना भर दिया, तो तोड़फोड़ क्यों?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए शहर के भवन मालिकों और बिल्डरों ने राहत की सांस ली है। उनका मुख्य तर्क है कि कई भवन मालिकों का दावा है कि उन्होंने नक्शा विचलन को लेकर जेएनएसी द्वारा निर्धारित जुर्माने का पहले ही भुगतान कर दिया है।बिल्डरों के अनुसार, जब मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, तो ऐसी स्थिति में एकतरफा तोड़फोड़ की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं थी।
क्या था मामला?
झारखंड हाई कोर्ट ने शहर में बढ़ रहे अवैध निर्माण और पार्किंग की जगह पर कमर्शियल गतिविधियों को लेकर सख्त नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने जेएनएसी को उन सभी इमारतों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था जिन्होंने स्वीकृत नक्शे के विपरीत जाकर अतिरिक्त निर्माण किया है। इसी आदेश के आलोक में आज जेएनएसी एक्शन मोड में था।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। फिलहाल शहर के उन दो दर्जन से अधिक भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी आलीशान इमारतों पर आज प्रशासन का बुलडोजर चलने वाला था।
