
जमशेदपुर:असम के कोकराझार जिले में संथाल आदिवासी समुदाय के घरों को जलाए जाने और उनके साथ हुई हिंसा के विरोध में झारखंड के आदिवासियों ने हुंकार भरी है। माझी पारगना माहाल (धाड़ दिशोम) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा।
सोहराय उत्सव के दौरान भड़की हिंसा: 40 घर खाक
देश पारगना बैजू मुर्मू के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में घटना की भयावहता का जिक्र किया गया है। बताया गया कि बीती 19 और 20 जनवरी को कोकराझार के गौरीनगर और करीगांव में यह दुखद घटना घटी।सोहराय उत्सव के दौरान एक सड़क दुर्घटना हुई, जिसके बाद फैली अफवाह ने हिंसक रूप ले लिया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही उपद्रवियों ने करीब 40 आदिवासी घरों को आग के हवाले कर दिया। इस आगजनी में पीड़ितों का राशन, कपड़े, कीमती दस्तावेज और मवेशी पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए।
राष्ट्रपति से की गई प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे हैं जिसमें प्रत्येक पीड़ित परिवार को तत्काल 15-15 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और उनके पूर्ण पुनर्वास की सरकारी व्यवस्था हो। निर्दोष आदिवासियों की रिहाई हो और आगजनी व हिंसा करने वाले असली दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।असम में दशकों से रह रहे संथाल, हो, मुंडा और उरांव समुदायों को अब तक अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला है। अधिकारों के इसी अभाव के कारण वे अक्सर हिंसा और शोषण का शिकार होते हैं। उन्हें तत्काल एसटी सूची में शामिल किया जाए।
“अधिकारों के बिना असुरक्षित हैं आदिवासी”
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु असम सरकार को एक ठोस सुरक्षा योजना बनानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो समाज बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
मांग पत्र सौंपने के दौरान देश पारानिक दुर्गा चरण मुर्मू सहित माझी पारगना माहाल के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और समाज के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
