
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के अल्पसंख्यक उच्च विद्यालयों में व्याप्त शैक्षणिक और प्रशासनिक अव्यवस्था के खिलाफ शिक्षकों ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को अल्पसंख्यक माध्यमिक शिक्षक संघ (पूर्वी सिंहभूम) की जिला इकाई ने जिले के 18 अल्पसंख्यक स्कूलों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री (सह शिक्षा मंत्री) के नाम एक मांग पत्र उपायुक्त को सौंपा।
2 साल से लटकी है नवनियुक्त शिक्षकों की किस्मत
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया कि जिले के विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों का चयन तो हो चुका है, लेकिन निदेशालय स्तर पर अनुमोदन की प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से लंबित है।शिक्षकों की कमी के बावजूद, चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नवनियुक्त शिक्षक योगदान नहीं दे पा रहे हैं।सरकारी अनुमोदन न मिलने के कारण ये शिक्षक वेतन से वंचित हैं और भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
अल्पसंख्यक स्कूलों को भी मिले ‘प्लस टू’ का दर्जा
संघ की एक प्रमुख मांग यह है कि जिस प्रकार राज्य के अन्य सरकारी विद्यालयों को प्लस टू (10+2) में उत्क्रमित किया जा रहा है, उसी तर्ज पर अल्पसंख्यक उच्च विद्यालयों को भी प्लस टू का दर्जा दिया जाए। इससे गरीब और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे क्षेत्रों में भटकना नहीं पड़ेगा।
स्वास्थ्य बीमा और बकाया वेतन की मांग
संघ ने शिक्षकों के हितों के लिए दो अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी जोर दिया जिसमे सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की तरह ही अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ दिया जाए।शिक्षकों के लंबे समय से लंबित बकाया वेतन का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
नेतृत्व और चेतावनी
इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष शशि भूषण दुबे और सचिव नागेश्वर प्रसाद ने स्पष्ट कहा कि अल्पसंख्यक विद्यालयों में नियुक्ति का अधिकार प्रबंध समिति के पास है, लेकिन सरकार को वेतन भुगतान के लिए समय पर अनुमोदन देना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
अध्यक्ष शशि भूषण दुबे, सचिव नागेश्वर प्रसाद, उपाध्यक्ष पलविंदर सिंह, कोषाध्यक्ष रंजीत कौर गिल और राज्य कार्यकारिणी सदस्य रेशमा जबीन समेत कई शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद थे। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द संज्ञान नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।
