जमशेदपुर: लौहनगरी के साकची स्थित मोती लाल नेहरू पब्लिक स्कूल के ऑडिटोरियम में शुक्रवार सुबह 10:00 बजे से नदी और पर्वत संरक्षण पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हो गया। देश के इस बेहद महत्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. गोपाला गोवड़ा और ‘जलपुरुष’ के नाम से विश्व विख्यात राजेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।इस अवसर पर मंच से बोलते हुए अतिथियों ने साफ किया कि नदियां और पहाड़ देश की जीवनरेखा हैं, जिन्हें केवल भाषणों से नहीं बल्कि कड़े नीतिगत और कानूनी बदलावों से ही बचाया जा सकता है।
देश भर के शीर्ष पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों का जुटा महाकुंभ
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में पर्यावरण, कानून, शिक्षा और वन सेवा से जुड़े देश के कई बड़े नाम एक साथ एक मंच पर नजर आए। सम्मेलन के संरक्षक व जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय, प्रख्यात पर्यावरणविद दिनेश मिश्र, डॉ. गोपाल शर्मा, बी. सत्यनारायणा, बिभूति देबबर्मा, अरुण कुमार शुक्ला, युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण, भारतीय वन सेवा (IFS) के वरीय अधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी और एमिटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीयूष कांत पांडेय सहित देशभर से आए प्रतिनिधि इस ऐतिहासिक सत्र के साक्षी बने।
आज के मुख्य तकनीकी सत्र: पर्वतों को बचाने के लिए बनेगा ‘कानूनी मसौदा’
सम्मेलन के संरक्षक सरयू राय ने उद्घाटन सत्र की सफलता के बाद आज दोपहर और शाम को होने वाले मुख्य तकनीकी सत्रों की रूपरेखा और समय-सारणी साझा की।
पर्वत संरक्षण कानून पर मंथन (अपराह्न 03:00 बजे से शाम 05:00 बजे): दोपहर बाद आयोजित होने वाले इस तकनीकी सत्र में देश में पर्वतों के अस्तित्व को बचाने के लिए एक ठोस ‘कानूनी मसौदे’ पर ग्रुप डिस्कशन होगा। इस सामूहिक विमर्श में 12 शीर्ष विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं, जो इस बात पर अपनी राय रखेंगे कि प्रस्तावित कानून में क्या जोड़ा जाए और कौन सी कमियां दूर की जाएं।
प्रजेंटेशन और पैनल डिस्कशन (शाम 05:45 बजे से रात्रि 07:45 बजे): आज के तीसरे और अंतिम सत्र में विभिन्न शोध पत्रों का प्रजेंटेशन होगा। इसमें 10 पैनलिस्ट शामिल होकर आज के औद्योगिक परिदृश्य और पर्यावरण के सह-अस्तित्व पर गंभीर विमर्श करेंगे।
7 राष्ट्रीय संस्थाओं का यह साझा प्रयास क्यों है बेहद खास?
दो दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन युगांतर भारती, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट, तरुण भारत संघ, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, जल बिरादरी, नेचर फाउंडेशन और मिशन Y संयुक्त रूप से कर रहे हैं।
सम्मेलन के 3 मुख्य संकल्प
ठोस नीति निर्माण: केंद्र और राज्य सरकारों के लिए नदियों और पहाड़ों के दोहन को रोकने हेतु एक व्यावहारिक नीति का ड्राफ्ट तैयार करना।
जन-जागरूकता: दलमा वन्यजीव अभयारण्य और स्वर्णरेखा जैसी जीवनदायिनी नदियों के किनारे रहने वाली आबादी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना।
सामूहिक प्रयास: सरकारी एजेंसियों, शिक्षण संस्थानों (जैसे आईआईटी ) और सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए एक साझा ब्लूप्रिंट तैयार करना।
