
धनबाद: समाज की रूढ़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले दो युवा वामपंथी नेताओं ने अपनी असल जिंदगी में भी ‘विद्रोह’ और ‘सादगी’ का परिचय दिया है। धनबाद की सड़कों पर आंदोलन के दौरान एक-दूसरे के हमसफर बने जानवी और गौरव विद्रोही ने बिना किसी तामझाम, शहनाई या मंत्रोच्चार के सादगीपूर्ण तरीके से विवाह कर दहेजमुक्त समाज का संदेश दिया है।
आंदोलन से शुरू हुआ ‘कॉमरेड’ का साथ
धनबाद सीपीआई (एमएल) के वरिष्ठ नेता कॉमरेड अजय प्रजापति की सुपुत्री, युवा नेत्री व कवयित्री जानवी और जौनपुर (यूपी) के सीपीआई (एमएल) प्रवक्ता कॉमरेड गौरव विद्रोही के बीच यह प्रेम संबंध संघर्ष और आंदोलनों के बीच पनपा। जहां युवा अक्सर शादियों में लाखों रुपये और रस्मों-रिवाजों का प्रदर्शन करते हैं, वहीं इस जोड़े ने केवल अपने विचारों की एकता को ही सबसे बड़ा बंधन माना।
न फेरे, न शहनाई—बस दिलों का मेल
इस विवाह की सबसे खास बात इसकी सादगी रही। मंगलवार को आयोजित इस संक्षिप्त कार्यक्रम में मात्र 10 लोग ही शामिल हुए।शादी में न तो शहनाई की धुन बजी, न ही किसी पंडित द्वारा मंत्रोच्चार हुआ। दूल्हे और दुल्हन के माता-पिता और परिजनों की मौजूदगी में दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामा और जीवन भर साथ चलने का संकल्प लिया। यह पूरी तरह से एक दहेजमुक्त और बिना किसी लेनदेन वाला विवाह था, जो आज के समय में युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है।
समाज को संदेश: रस्मों में नहीं, जज्बे में है प्रेम
जानवी और गौरव की यह प्रेमकथा केवल दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है। धनबाद के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस विवाह की जमकर चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि जहां शादियां अब दिखावे का बाजार बन चुकी हैं, वहां इन दो युवाओं ने यह साबित कर दिया कि सच्चा बंधन सादगी और आपसी सम्मान में बसता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
धनबाद सीपीआई (एमएल) के कार्यकर्ताओं ने इस जोड़े को बधाई देते हुए कहा कि यह शादी न सिर्फ एक निजी फैसला है, बल्कि यह उस विचारधारा का विस्तार है जिसके लिए ये दोनों सड़कों पर लड़ते रहे हैं। अजय प्रजापति ने भी अपनी बेटी के इस फैसले का गर्व से समर्थन किया और समाज को दहेज जैसी बुराई को त्यागने की अपील की।
